मकरसंक्रांति क्यूँ मनाते है

मकरसंक्रांति – हमारे देश में त्यौहारो का बहुत महत्त्व है हर महीने कोई न कोई एक त्यौहार आ ही जाता है ऐसे भी कह सकते है की हमारा भारत देश त्यौहारो से बना है यहाँ हर प्रान्त के लोगो द्वारा अपनी संस्कृति के अनुसार त्यौहार मनाया जाता है जिसमे से एक त्यौहार नये साल के अंदर आ जाता है मतलब की जनवरी पौष महीने में 14 और 15 तारीख को जिसे हमारे देश में मकर संक्रांति नाम से जाना जाता है इस दिन सूर्य धनु राशी को छोड़ मकर राशी में प्रवेश करता है। मकर संक्रांति हमारे देश का प्रमुख पर्व है यह भारतवर्ष तथा नेपाल के सभी प्रांतों में अलग-अलग नाम व भांति-भांति के रीति-रिवाजों द्वारा भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जाता है.

वेसे तो मकर संक्रांति त्यौहार की शुरुवात 10-15 दिन पहले से ही हो जाती है जहा घर की महिलाये कुछ न कुछ सक्रांत को कल्पने (दान )के लिए खरीददारी बाजार में करती रहती है और दूसरी जगह पतंगों का मार्केट आस पड़ोस में लग जाता है जिससे कई बच्चे और बड़े सब पतंगों की खरीददारी करते रहे है और आसमान में ऊँची पतंग करके एक दुसरे से पेन्चे लडाते है वोह काटा कह कर दुसरे साथी की पतंग को काटने के बाद कहते है

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकरसंक्रांति

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकरसंक्रांति मनाई जाती है

खगोलशास्त्र के अनुसार मकरसंक्रांति

सूर्य जब दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, या पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है उस दिन मकरसंक्रांति का पर्व मनाया जाता है

मकरसंक्रांति का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार पवित्र नदी गंगा,यमुना,गोदावरी, कृष्णा और कावेरी में डुबकी लगाने से इन्सान को खूब लाभ मिलता है स्नान करने से सभी अतीत और वर्तमान पाप धुल जाते है और आपको एक स्वस्थ समृद्ध और सफल जीवन प्रदान होता है इस समय पंजाब,बिहार,यूपी,तमिलनाडु और कई प्रान्तों में किसान अपनी फसल काटते है नई फसलों की कटाई का समय होता है मकरसंक्रांति के दिन लोग स्नान और दान-पुण्ये बहुत करते है पुराण के मुताबिक सूर्य के उत्तरायण होने के दिन यानी मकरसंक्रांति के दिन दान पुण्य का बहुत महत्व होता है मकरसंक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए ऐसा करने से दस हजार गौदान का फल प्राप्त होता है इस दिन ऊनी कपड़े,कम्बल,तिल और गुड़ से बने व्यंजन व खिचड़ी दान करने से भगवान सूर्य एवं शनि देव की कृपा प्राप्त होती है

 मकरसंक्रांति पर पतंग
मकरसंक्रांति पर पतंग

मकरसंक्रांति से ही ऋतु में परिवर्तन होने लगता है शरद ऋतु का प्रभाव कम होने लगता है और इसके बाद बसंत मौसम का आगमन आरंभ हो जाता है इसके फलस्वरूप दिन लंबे और रात छोटी होने लगती है

मकरसंक्रांति की पौराणिक कथाए

ऐसा कहा जाता है की इस दिन भीष्म पितामह महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करते रहे और उन्होंने मकरसंक्रान्ति के दिन अपने प्राण त्यागे थे और ईसी दिन मां यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था मकरसंक्रांति के दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर फेंका था इस दिन भगवान की जीत होने के अवसर पर भी मकरसंक्रांति मनाने का पर्व है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर जाते हैं ऐसे में पिता और पुत्र के बीच प्रेम बढ़ता है ऐसे में भगवान सूर्य और शनि की अराधना शुभ फल देने वाला होता है.

मै आशा करता हु की आप सब इस दिन को खूब धूमधाम से मनाएंगे इस दिन के अवसर पर आपके घर और आपमें खूब सुख और स्म्रधि लाये ||धन्यवाद